डॉ. सोमनाथ शुक्ल
हिंदी कवि-लेखक
– हिंदी भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार में अग्रणी भूमिका
– पर्यावरण संरक्षण की चेतना फैलाने वाली रचनाओं का सृजन
– सामाजिक मुद्दों पर आधारित काव्य का प्रणयन
– भारतीय संस्कृति और मूल्यों को दर्शाती रचनाएं
– नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक साहित्य का सृजन
– धार्मिक और आध्यात्मिक भजनों की रचना
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डॉ. सोमनाथ शुक्ल
कवि-लेखक
परिचय
डॉ. सोमनाथ शुक्ल समकालीन हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित कवि एवं लेखक हैं। प्रयागराज की पावन भूमि पर जन्मे डॉ. शुक्ल ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से विद्या-वाचस्पति की मानद उपाधि प्राप्त की है। वर्तमान में भारतीय जीवन बीमा निगम में कार्यरत आप कविता, गीत, ग़ज़ल, लेख, समीक्षा, दोहा और नव-गीत जैसी विविध विधाओं में सिद्धहस्त हैं।
आपकी मुख्य कृति “सोमनाथ शुक्ल के सौ शेर” गुफ्तगू प्रकाशन से प्रकाशित है। साथ ही 7 साझा काव्य संकलनों में आपकी रचनाएं संकलित हैं। विभिन्न समाचार पत्रों में 100+ रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं। पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक चेतना और भारतीय संस्कृति आपके लेखन के मूल स्तंभ हैं।
साझा काव्य संकलन:
1. नव मुक्तक सृजन (काव्य संकलन)
2. अधूरी ग़ज़ल (ग़ज़ल संग्रह)
3. भारत के प्रतिभाशाली कवि (काव्य संकलन)
4. काव्य की गूंज (काव्य संग्रह)
5. पर्यावरण रक्षक (काव्य संग्रह)
6. मेरे तरीके मेरी दुनिया (काव्य संग्रह)
7. ऑपरेशन सिन्दूर (कविता संग्रह)
मेरी पुस्तकें
शाम तक लौटा नहीं
डॉ. सोमनाथ शुक्ल का आगामी ग़ज़ल संग्रह। प्रेम, विरह और जीवन की गहरी अनुभूतियों से भरपूर यह कृति शीघ्र ही गुफ्तगू पब्लिकेशन से प्रकाशित होने जा रही है। ग़ज़ल की मधुर धुन में पिरोई गई भावनाओं का यह खजाना पाठकों के लिए एक सुखद अनुभव लेकर आएगा।
Sunrise Seranade
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आगामी कार्यक्रम
Jun 22nd
Divi Bookstore
San Francisco, CA @ 6:30pm
Live Reading
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Jun 22nd
Monarch Books
Los Angeles, CA @ 7:15pm
Book Signing
Aug 31st
Bloom Binding
Brooklyn, NY @ 6pm
Live Reading
थकानें दिन की ले हम रात को घर पर ठहरते हैं कि जैसे शाख पर थक-हारकर पंछी उतरते हैं, वफ़ा की गर्मियाँ लहज़े की ठंडक प्यार की बारिश हमारे दर से हो करके कई मौसम गुज़रते हैं.
रोज का मिलना कहाँ है आजकल मुमकिन हमारा साथ गुजरे हैं पहर जो एक अल्बम हो गये हैं हम, बने कठपुतलियाँ हैं बन्दिशों, मजबूरियों के वक़्त के ये हाथ कितने आज निर्मम हो गये हैं.
डॉ. सोमनाथ शुक्ल
हिंदी भाषा और साहित्य की समृद्धि के लिए निरंतर कार्य करते हुए, भारतीय संस्कृति और मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना।
